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فَقَالُوْا عَلَى اللّٰهِ تَوَكَّلْنَا ۚرَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظّٰلِمِيْنَ   ( يونس: ٨٥ )

Then they said
فَقَالُوا۟
तो उन्होंने कहा
"Upon
عَلَى
अल्लाह ही पर
Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह ही पर
we put our trust
تَوَكَّلْنَا
तवक्कल किया हमने
Our Lord!
رَبَّنَا
ऐ हमारे रब
(Do) not
لَا
ना तू बनाना हमें
make us
تَجْعَلْنَا
ना तू बनाना हमें
a trial
فِتْنَةً
फ़ितना
for the people -
لِّلْقَوْمِ
उन लोगों के लिए
the wrongdoers
ٱلظَّٰلِمِينَ
जो ज़ालिम हैं

Faqaloo 'ala Allahi tawakkalna rabbana la taj'alna fitnatan lilqawmi alththalimeena (al-Yūnus 10:85)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

इसपर वे बोले, 'हमने अल्लाह पर भरोसा किया। ऐ हमारे रब! तू हमें अत्याचारी लोगों के हाथों आज़माइश में न डाल

English Sahih:

So they said, "Upon Allah do we rely. Our Lord, make us not [objects of] trial for the wrongdoing people ([10] Yunus : 85)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

उस पर उन लोगों ने अर्ज़ की हमने तो ख़ुदा ही पर भरोसा कर लिया है और दुआ की कि ऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना