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अल इस्रा आयत ६७ | Al-Isra 17:67

And when
وَإِذَا
और जब
touches you
مَسَّكُمُ
पहुँचती है तुम्हें
the hardship
ٱلضُّرُّ
तकलीफ़
in
فِى
समुन्दर में
the sea
ٱلْبَحْرِ
समुन्दर में
lost
ضَلَّ
गुम हो जाते हैं
(are) who
مَن
वो जिन्हें
you call
تَدْعُونَ
तुम पुकारते हो
except
إِلَّآ
मगर
Him Alone
إِيَّاهُۖ
सिर्फ़ वो ही
But when
فَلَمَّا
तो जब
He delivers you
نَجَّىٰكُمْ
वो निजात देता है तुम्हें
to
إِلَى
तरफ़ ख़ुश्की के
the land
ٱلْبَرِّ
तरफ़ ख़ुश्की के
you turn away
أَعْرَضْتُمْۚ
तो ऐराज़ करते हो तुम
And is
وَكَانَ
और है
man
ٱلْإِنسَٰنُ
इन्सान
ungrateful
كَفُورًا
बड़ा नाशुक्रा

Waitha massakumu alddurru fee albahri dalla man tad'oona illa iyyahu falamma najjakum ila albarri a'radtum wakana alinsanu kafooran

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जब समुद्र में तुम पर कोई आपदा आती है तो उसके सिवा वे सब जिन्हें तुम पुकारते हो, गुम होकर रह जाते है, किन्तु फिर जब वह तुम्हें बचाकर थल पर पहुँचा देता है तो तुम उससे मुँह मोड़ जाते हो। मानव बड़ा ही अकृतज्ञ है

English Sahih:

And when adversity touches you at sea, lost are [all] those you invoke except for Him. But when He delivers you to the land, you turn away [from Him]. And ever is man ungrateful.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और जब समन्दर में कभी तुम को कोई तकलीफ पहुँचे तो जिनकी तुम इबादत किया करते थे ग़ायब हो गए मगर बस वही (एक ख़ुदा याद रहता है) उस पर भी जब ख़ुदा ने तुम को छुटकारा देकर खुशकी तक पहुँचा दिया तो फिर तुम इससे मुँह मोड़ बैठें और इन्सान बड़ा ही नाशुक्रा है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

और जब सागर में तुमपर कोई आपदा आ पड़ती है, तो अल्लाह के सिवा जिन्हें तुम पुकारते हो, खो देते (भूल जाते) हो[1] और जब तुम्हें बचाकर थल तक पहुँचा देता है, तो मुख फेर लेते हो और मनुष्य है ही अति कृतघ्न।