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وَجَعَلْنَا السَّمَاۤءَ سَقْفًا مَّحْفُوْظًاۚ وَهُمْ عَنْ اٰيٰتِهَا مُعْرِضُوْنَ   ( الأنبياء: ٣٢ )

And We made
وَجَعَلْنَا
और बनाया हमने
the sky
ٱلسَّمَآءَ
आसमान को
a roof
سَقْفًا
छत
protected
مَّحْفُوظًاۖ
महफ़ूज़
But they
وَهُمْ
और वो
from
عَنْ
उसकी निशानियों से
its Signs
ءَايَٰتِهَا
उसकी निशानियों से
turn away
مُعْرِضُونَ
मूँह मोड़ने वाले हैं

Waja'alna alssamaa saqfan mahfoothan wahum 'an ayatiha mu'ridoona (al-ʾAnbiyāʾ 21:32)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और हमने आकाश को एक सुरक्षित छत बनाया, किन्तु वे है कि उसकी निशानियों से कतरा जाते है

English Sahih:

And We made the sky a protected ceiling, but they, from its signs, are turning away. ([21] Al-Anbya : 32)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और हम ही ने आसमान को छत बनाया जो हर तरह महफूज़ है और ये लोग उसकी आसमानी निशानियों से मुँह फेर रहे हैं