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अल-मुमिनून आयत ४७ | Al-Mu’minun 23:47

Then they said
فَقَالُوٓا۟
तो वो कहने लगे
"Shall we believe
أَنُؤْمِنُ
क्या हम ईमान लाऐं
(in) two men
لِبَشَرَيْنِ
दो इन्सानों पर
like ourselves
مِثْلِنَا
अपने जैसे
while their people
وَقَوْمُهُمَا
और क़ौम उन दोनों की
for us
لَنَا
हमारे लिए
(are) slaves"
عَٰبِدُونَ
ताबेअदार है

Faqaloo anuminu libasharayni mithlina waqawmuhuma lana 'abidoona

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

तो व कहने लगे, 'क्या हम अपने ही जैसे दो मनुष्यों की बात मान लें, जबकि उनकी क़ौम हमारी ग़ुलाम भी है?'

English Sahih:

They said, "Should we believe two men like ourselves while their people are for us in servitude?"

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

आपस मे कहने लगे क्या हम अपने ही ऐसे दो आदमियों पर ईमान ले आएँ हालाँकि इन दोनों की (क़ौम की) क़ौम हमारी ख़िदमत गारी करती है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

उन्होंने कहाः क्या हम ईमान लायें अपने जैसे दो व्यक्तियों पर, जबकि उन दोनों की जाति हमारे अधीन है?