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اِنَّمَا كَانَ قَوْلَ الْمُؤْمِنِيْنَ اِذَا دُعُوْٓا اِلَى اللّٰهِ وَرَسُوْلِهٖ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ اَنْ يَّقُوْلُوْا سَمِعْنَا وَاَطَعْنَاۗ وَاُولٰۤىِٕكَ هُمُ الْمُفْلِحُوْنَ   ( النور: ٥١ )

Only
إِنَّمَا
बेशक
is
كَانَ
है
(the) statement
قَوْلَ
क़ौल
(of) the believers
ٱلْمُؤْمِنِينَ
मोमिनों का
when
إِذَا
जब
they are called
دُعُوٓا۟
वो बुलाए जाते हैं
to
إِلَى
तरफ़ अल्लाह के
Allah
ٱللَّهِ
तरफ़ अल्लाह के
and His Messenger
وَرَسُولِهِۦ
और उसके रसूल के
to judge
لِيَحْكُمَ
कि वो फ़ैसला करे
between them
بَيْنَهُمْ
दर्मियान उनके
(is) that
أَن
कि
they say
يَقُولُوا۟
वो कहते हैं
"We hear
سَمِعْنَا
सुन लिया हमने
and we obey"
وَأَطَعْنَاۚ
और इताअत की हमने
And those
وَأُو۟لَٰٓئِكَ
और यही लोग हैं
[they]
هُمُ
वो
(are) the successful
ٱلْمُفْلِحُونَ
जो फ़लाह पाने वाले हैं

Innama kana qawla almumineena itha du'oo ila Allahi warasoolihi liyahkuma baynahum an yaqooloo sami'na waata'na waolaika humu almuflihoona (an-Nūr 24:51)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

मोमिनों की बात तो बस यह होती है कि जब अल्लाह और उसके रसूल की ओर बुलाए जाएँ, ताकि वह उनके बीच फ़ैसला करे, तो वे कहें, 'हमने सुना और आज्ञापालन किया।' और वही सफलता प्राप्त करनेवाले हैं

English Sahih:

The only statement of the [true] believers when they are called to Allah and His Messenger to judge between them is that they say, "We hear and we obey." And those are the successful. ([24] An-Nur : 51)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

ईमानदारों का क़ौल तो बस ये है कि जब उनको ख़ुदा और उसके रसूल के पास बुलाया जाता है ताकि उनके बाहमी झगड़ों का फैसला करो तो कहते हैं कि हमने (हुक्म) सुना और (दिल से) मान लिया और यही लोग (आख़िरत में) कामयाब होने वाले हैं