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فَقَالَ اِنِّيْٓ اَحْبَبْتُ حُبَّ الْخَيْرِ عَنْ ذِكْرِ رَبِّيْۚ حَتّٰى تَوَارَتْ بِالْحِجَابِۗ  ( ص: ٣٢ )

And he said
فَقَالَ
तो उसने कहा
"Indeed I
إِنِّىٓ
बेशक मैं
[I] preferred
أَحْبَبْتُ
महबूब रखा मैं ने
(the) love
حُبَّ
मुहब्बत को
(of) the good
ٱلْخَيْرِ
माल की
for
عَن
याद की वजह से
(the) remembrance
ذِكْرِ
याद की वजह से
(of) my Lord"
رَبِّى
अपने रब की
Until
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
they were hidden
تَوَارَتْ
वो छुप गए
in the veil;
بِٱلْحِجَابِ
परदे में

Faqala innee ahbabtu hubba alkhayri 'an thikri rabbee hatta tawarat bialhijabi (Ṣād 38:32)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

तो उसने कहा, 'मैंने इनके प्रति प्रेम अपने रब की याद के कारण अपनाया है।' यहाँ तक कि वे (घोड़े) ओट में छिप गए

English Sahih:

And he said, "Indeed, I gave preference to the love of good [things] over the remembrance of my Lord until it [i.e., the sun] disappeared into the curtain [of darkness]." ([38] Sad : 32)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

तो देखने में उलझे के नवाफिल में देर हो गयी जब याद आया तो बोले कि मैंने अपने परवरदिगार की याद पर माल की उलफ़त को तरजीह दी यहाँ तक कि आफ़ताब (मग़रिब के) पर्दे में छुप गया