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अल-फतह आयत १२ | Al-Fatah 48:12

Nay
بَلْ
बल्कि
you thought
ظَنَنتُمْ
गुमान किया तुमने
that
أَن
कि
(would) never
لَّن
हरगिज़ नहीं
return
يَنقَلِبَ
पलट कर आऐंगे
the Messenger
ٱلرَّسُولُ
रसूल
and the believers
وَٱلْمُؤْمِنُونَ
और मोमिन
to
إِلَىٰٓ
तरफ़ अपने घर वालों के
their families
أَهْلِيهِمْ
तरफ़ अपने घर वालों के
ever
أَبَدًا
कभी भी
that was made fair-seeming
وَزُيِّنَ
और मुज़य्यन कर दी गई
that was made fair-seeming
ذَٰلِكَ
ये (बात)
in
فِى
तुम्हारे दिलों में
your hearts
قُلُوبِكُمْ
तुम्हारे दिलों में
And you assumed
وَظَنَنتُمْ
और गुमान किया तुमने
an assumption
ظَنَّ
गुमान
evil
ٱلسَّوْءِ
बुरा
and you became
وَكُنتُمْ
और हो तुम
a people
قَوْمًۢا
लोग
ruined"
بُورًا
हलाक होने वाले

Bal thanantum an lan yanqaliba alrrasoolu waalmuminoona ila ahleehim abadan wazuyyina thalika fee quloobikum wathanantum thanna alssawi wakuntum qawman booran

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

'नहीं, बल्कि तुमने यह समझा कि रसूल और ईमानवाले अपने घरवालों की ओर लौटकर कभी न आएँगे और यह तुम्हारे दिलों को अच्छा लगा। तुमने तो बहुत बुरे गुमान किए और तुम्हीं लोग हुए तबाही में पड़नेवाले।'

English Sahih:

But you thought that the Messenger and the believers would never return to their families, ever, and that was made pleasing in your hearts. And you assumed an assumption of evil and became a people ruined."

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(ये फ़क़त तुम्हारे हीले हैं) बात ये है कि तुम ये समझे बैठे थे कि रसूल और मोमिनीन हरगिज़ कभी अपने लड़के वालों में पलट कर आने ही के नहीं (और सब मार डाले जाएँगे) और यही बात तुम्हारे दिलों में भी खप गयी थी और इसी वजह से, तुम तरह तरह की बदगुमानियाँ करने लगे थे और (आख़िरकार) तुम लोग आप बरबाद हुए

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

बल्कि, तुमने सोचा था कि कदापि वापस नहीं आयेंगे रसूल और न ईमान वाले, अपने परिजनों की ओर, कभी भी और भली लगी ये बात तुम्हारे दिलों को और तुमने बुरी सोच सोची और थे ही तुम विनाश होने वाले लोग।