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وَالَّذِيْنَ يُظٰهِرُوْنَ مِنْ نِّسَاۤىِٕهِمْ ثُمَّ يَعُوْدُوْنَ لِمَا قَالُوْا فَتَحْرِيْرُ رَقَبَةٍ مِّنْ قَبْلِ اَنْ يَّتَمَاۤسَّاۗ ذٰلِكُمْ تُوْعَظُوْنَ بِهٖۗ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُوْنَ خَبِيْرٌ   ( المجادلة: ٣ )

And those who
وَٱلَّذِينَ
और वो लोग जो
pronounce zihar
يُظَٰهِرُونَ
ज़िहार करते हैं
[from]
مِن
अपनी बीवियों से
(to) their wives
نِّسَآئِهِمْ
अपनी बीवियों से
then
ثُمَّ
फिर
go back
يَعُودُونَ
वो रुजूअ कर लेते हैं
on what
لِمَا
उससे जो
they said
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
then freeing
فَتَحْرِيرُ
पस आज़ाद करना है
(of) a slave
رَقَبَةٍ
एक गर्दन का
before
مِّن
इससे क़ब्ल
before
قَبْلِ
इससे क़ब्ल
[that]
أَن
कि
they touch each other
يَتَمَآسَّاۚ
वो दोनों एक दूसरे को छुऐं
That
ذَٰلِكُمْ
ये है
you are admonished
تُوعَظُونَ
तुम नसीहत किए जाते हो
to it
بِهِۦۚ
जिसकी
And Allah
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
of what
بِمَا
उससे जो
you do
تَعْمَلُونَ
तुम अमल करते हो
(is) All-Aware
خَبِيرٌ
ख़ूब बाख़बर है

Waallatheena yuthahiroona min nisaihim thumma ya'oodoona lima qaloo fatahreeru raqabatin min qabli an yatamassa thalikum too'athoona bihi waAllahu bima ta'maloona khabeerun (al-Mujādilah 58:3)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं; फिर जो बात उन्होंने कही थी उससे रुजू करते है, तो इससे पहले कि दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ एक गर्दन आज़ाद करनी होगी। यह वह बात है जिसकी तुम्हें नसीहत की जाती है, और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसकी ख़बर रखता है

English Sahih:

And those who pronounce thihar from their wives and then [wish to] go back on what they said – then [there must be] the freeing of a slave before they touch one another. That is what you are admonished thereby; and Allah is Aware of what you do. ([58] Al-Mujadila : 3)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और जो लोग अपनी बीवियों से ज़हार कर बैठे फिर अपनी बात वापस लें तो दोनों के हमबिस्तर होने से पहले (कफ्फ़ारे में) एक ग़ुलाम का आज़ाद करना (ज़रूरी) है उसकी तुमको नसीहत की जाती है और तुम जो कुछ भी करते हो (ख़ुदा) उससे आगाह है