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अल-कद्र आयत ५ | Al-Qadr 97:5

Peace
سَلَٰمٌ
सलामती है
it (is)
هِىَ
वो
until
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
(the) emergence
مَطْلَعِ
तुलूअ हो जाए
(of) the dawn
ٱلْفَجْرِ
फ़जर

Salamun hiya hatta matla'i alfajri

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

वह रात पूर्णतः शान्ति और सलामती है, उषाकाल के उदय होने तक

English Sahih:

Peace it is until the emergence of dawn.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

वह शान्ति की रात्रि है, जो भोर होने तक रहती है।[1]