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وَلَمْ تَكُنْ لَّهٗ فِئَةٌ يَّنْصُرُوْنَهٗ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ وَمَا كَانَ مُنْتَصِرًاۗ   ( الكهف: ٤٣ )

And not
وَلَمْ
और ना
was
تَكُن
थे
for him
لَّهُۥ
उसके लिए
a group
فِئَةٌ
जमाअत (के लोग)
(to) help him
يَنصُرُونَهُۥ
जो मदद करते उसकी
other than
مِن
सिवाय
other than
دُونِ
सिवाय
Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह के
and not
وَمَا
और ना
was
كَانَ
था वो
(he) supported
مُنتَصِرًا
बदला लेने वाला

Walam takun lahu fiatun yansuroonahu min dooni Allahi wama kana muntasiran (al-Kahf 18:43)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

उसका कोई जत्था न हुआ जो उसके और अल्लाह के बीच पड़कर उसकी सहायता करता और न उसे स्वयं बदला लेने की सामर्थ्य प्राप्त थी

English Sahih:

And there was for him no company to aid him other than Allah, nor could he defend himself. ([18] Al-Kahf : 43)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और ख़ुदा के सिवा उसका कोई जत्था भी न था कि उसकी मदद करता और न वह बदला ले सकता था इसी जगह से (साबित हो गया