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आले इमरान आयत २१ | Aal-e-Imran 3:21

Indeed
إِنَّ
बेशक
those who
ٱلَّذِينَ
वो जो
disbelieve
يَكْفُرُونَ
कुफ़्र करते हैं
in (the) Signs (of)
بِـَٔايَٰتِ
साथ आयात के
Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह की
and they kill
وَيَقْتُلُونَ
और वो क़त्ल करते हैं
the Prophets
ٱلنَّبِيِّۦنَ
नबियों को
without
بِغَيْرِ
बग़ैर
right
حَقٍّ
हक़ के
and they kill
وَيَقْتُلُونَ
और वो क़त्ल करते हैं
those who
ٱلَّذِينَ
उनको जो
order
يَأْمُرُونَ
हुक्म देते हैं
[with] justice
بِٱلْقِسْطِ
इन्साफ़ का
among
مِنَ
लोगों में से
the people
ٱلنَّاسِ
लोगों में से
then give them tidings
فَبَشِّرْهُم
तो ख़ुशख़बरी दे दीजिए उन्हें
of a punishment
بِعَذَابٍ
अज़ाब
painful
أَلِيمٍ
दर्दनाक की

Inna allatheena yakfuroona biayati Allahi wayaqtuloona alnnabiyyeena bighayri haqqin wayaqtuloona allatheena yamuroona bialqisti mina alnnasi fabashshirhum bi'athabin aleemin

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जो लोग अल्लाह की आयतों का इनकार करें और नबियों को नाहक क़त्ल करे और उन लोगों का क़ल्त करें जो न्याय के पालन करने को कहें, उनको दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो

English Sahih:

Those who disbelieve in the signs of Allah and kill the prophets without right and kill those who order justice from among the people – give them tidings of a painful punishment.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

बेशक जो लोग ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते हैं और नाहक़ पैग़म्बरों को क़त्ल करते हैं और उन लोगों को (भी) क़त्ल करते हैं जो (उन्हें) इन्साफ़ करने का हुक्म करते हैं तो (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

जो लोग अल्लाह की आयतों के साथ कुफ़्र करते हों तथा नबियों को अवैध वध करते हों, तथा उन लोगों का वध करते हों, जो न्याय का आदेश देते हैं, तो उन्हें दुःखदायी यातना[1] की शुभ सूचना सुना दो।