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आले इमरान आयत ७१ | Aal-e-Imran 3:71

O People
يَٰٓأَهْلَ
ऐ अहले किताब
(of) the Book!
ٱلْكِتَٰبِ
ऐ अहले किताब
Why
لِمَ
क्यों
do you mix
تَلْبِسُونَ
तुम गुड-मुड करते हो
the truth
ٱلْحَقَّ
हक़ को
with the falsehood
بِٱلْبَٰطِلِ
बातिल से
and conceal
وَتَكْتُمُونَ
और तुम छुपाते हो
the truth
ٱلْحَقَّ
हक़ को
while you
وَأَنتُمْ
हालाँकि तुम
know?
تَعْلَمُونَ
तुम जानते हो

Ya ahla alkitabi lima talbisoona alhaqqa bialbatili wataktumoona alhaqqa waantum ta'lamoona

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

ऐ किताबवालो! सत्य को असत्य के साथ क्यों गड्ड-मड्ड करते और जानते-बूझते हुए सत्य को छिपाते हो?

English Sahih:

O People of the Scripture, why do you mix [i.e., confuse] the truth with falsehood and conceal the truth while you know [it]?

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

ऐ अहले किताब तुम क्यो हक़ व बातिल को गड़बड़ करते और हक़ को छुपाते हो हालॉकि तुम जानते हो

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

हे अह्ले किताब! क्यों सत्य को असत्य के साथ मिलाकर संदिग्ध कर देते हो और सत्य को छुपाते हो, जबकि तुम जानते हो?