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وَاللّٰهُ اَعْلَمُ بِاَعْدَاۤىِٕكُمْ ۗوَكَفٰى بِاللّٰهِ وَلِيًّا ۙوَّكَفٰى بِاللّٰهِ نَصِيْرًا   ( النساء: ٤٥ )

And Allah
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
knows better
أَعْلَمُ
ज़्यादा जानता है
about your enemies
بِأَعْدَآئِكُمْۚ
तुम्हारे दुश्मनों को
and (is) sufficient
وَكَفَىٰ
और काफ़ी है
Allah
بِٱللَّهِ
अल्लाह
(as) a Protector
وَلِيًّا
दोस्त
and sufficient
وَكَفَىٰ
और काफ़ी है
(is) Allah
بِٱللَّهِ
अल्लाह
(as) a Helper
نَصِيرًا
मददगार

WaAllahu a'lamu bia'daikum wakafa biAllahi waliyyan wakafa biAllahi naseeran (an-Nisāʾ 4:45)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

अल्लाह तुम्हारे शत्रुओं को भली-भाँति जानता है। अल्लाह एक संरक्षक के रूप में काफ़ी है और अल्लाह एक सहायक के रूप में भी काफ़ी है

English Sahih:

And Allah is most knowing of your enemies; and sufficient is Allah as an ally, and sufficient is Allah as a helper. ([4] An-Nisa : 45)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और ख़ुदा तुम्हारे दुशमनों से ख़ूब वाक़िफ़ है और दोस्ती के लिए बस ख़ुदा काफ़ी है और हिमायत के वास्ते भी ख़ुदा ही काफ़ी है