Skip to main content

अल-आराफ़ आयत ५ | Al-Aaraf 7:5

Then not
فَمَا
तो ना
was
كَانَ
थी
their plea
دَعْوَىٰهُمْ
पुकार उनकी
when
إِذْ
जब
came to them
جَآءَهُم
आया उनके पास
Our punishment
بَأْسُنَآ
अज़ाब हमारा
except
إِلَّآ
मगर
that
أَن
ये कि
they said
قَالُوٓا۟
उन्होंने कहा
"Indeed we
إِنَّا
बेशक हम
were
كُنَّا
थे हम ही
wrongdoers"
ظَٰلِمِينَ
ज़ालिम

Fama kana da'wahum ith jaahum basuna illa an qaloo inna kunna thalimeena

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जब उनपर यातना आ गई तो इसके सिवा उनके मुँह से कुछ न निकला कि वे पुकार उठे, 'वास्तव में हम अत्याचारी थे।'

English Sahih:

And their declaration when Our punishment came to them was only that they said, "Indeed, we were wrongdoers!"

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

कि वह लोग या तो रात की नींद सो रहे थे या दिन को क़लीला (खाने के बाद का लेटना) कर रहे थे तब हमारा अज़ाब उन पर आ पड़ा तो उनसे सिवाए इसके और कुछ न कहते बन पड़ा कि हम बेशक ज़ालिम थे

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

और जब उनपर हमारा प्रकोप आ पड़ा, तो उनकी पुकार यही थी कि वास्तव में हम ही अत्याचारी[1] थे।