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bismillah
قُلْ
कह दीजिए
أُوحِىَ
वही की गई
إِلَىَّ
मेरी तरफ़
أَنَّهُ
बेशक वो
ٱسْتَمَعَ
ग़ौर से सुना
نَفَرٌ
एक गिरोह ने
مِّنَ
जिन्नों में से
ٱلْجِنِّ
जिन्नों में से
فَقَالُوٓا۟
तो उन्होंने कहा
إِنَّا
बेशक हम
سَمِعْنَا
सुना हमने
قُرْءَانًا
क़ुरआन
عَجَبًا
अजीब

Qul oohiya ilayya annahu istama'a nafarun mina aljinni faqaloo inna sami'na quranan 'ajaban

कह दो, 'मेरी ओर प्रकाशना की गई है कि जिन्नों के एक गिरोह ने सुना, फिर उन्होंने कहा कि हमने एक मनभाता क़ुरआन सुना,

Tafseer (तफ़सीर )
يَهْدِىٓ
वो रहनुमाई करता है
إِلَى
तरफ़ भलाई के
ٱلرُّشْدِ
तरफ़ भलाई के
فَـَٔامَنَّا
पस ईमान लाए हम
بِهِۦۖ
उस पर
وَلَن
और हरगिज़ नहीं
نُّشْرِكَ
हम शरीक करेंगे
بِرَبِّنَآ
साथ अपने रब के
أَحَدًا
किसी एक को

Yahdee ila alrrushdi faamanna bihi walan nushrika birabbina ahadan

'जो भलाई और सूझ-बूझ का मार्ग दिखाता है, अतः हम उसपर ईमान ले आए, और अब हम कदापि किसी को अपने रब का साझी नहीं ठहराएँगे

Tafseer (तफ़सीर )
وَأَنَّهُۥ
और ये कि
تَعَٰلَىٰ
बहुत बुलन्द है
جَدُّ
शान
رَبِّنَا
हमारे रब की
مَا
नहीं
ٱتَّخَذَ
बनाई उसने
صَٰحِبَةً
कोई बीवी
وَلَا
और ना
وَلَدًا
कोई औलाद

Waannahu ta'ala jaddu rabbina ma ittakhatha sahibatan wala waladan

'और यह कि हमारे रब का गौरब अत्यन्त उच्च है। उसने अपने लिए न तो कोई पत्नी बनाई और न सन्तान

Tafseer (तफ़सीर )
وَأَنَّهُۥ
और ये कि
كَانَ
थे
يَقُولُ
कहा करते
سَفِيهُنَا
बेवक़ूफ़ हमारे
عَلَى
अल्लाह पर
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
شَطَطًا
ज़्यादती की बातें

Waannahu kana yaqoolu safeehuna 'ala Allahi shatatan

'और यह कि हममें का मूर्ख व्यक्ति अल्लाह के विषय में सत्य से बिल्कुल हटी हुई बातें कहता रहा है

Tafseer (तफ़सीर )
وَأَنَّا
और बेशक हम
ظَنَنَّآ
गुमान किया हमने
أَن
कि
لَّن
हरगिज़ नहीं
تَقُولَ
कहेंगे
ٱلْإِنسُ
इन्सान
وَٱلْجِنُّ
और जिन्न
عَلَى
अल्लाह पर
ٱللَّهِ
अल्लाह पर
كَذِبًا
कोई झूठ

Waanna thananna an lan taqoola alinsu waaljinnu 'ala Allahi kathiban

'और यह कि हमने समझ रखा था कि मनुष्य और जिन्न अल्लाह के विषय में कभी झूठ नहीं बोलते

Tafseer (तफ़सीर )
وَأَنَّهُۥ
और बेशक वो
كَانَ
थे
رِجَالٌ
कुछ लोग
مِّنَ
इन्सानों में से
ٱلْإِنسِ
इन्सानों में से
يَعُوذُونَ
जो पनाह लेते थे
بِرِجَالٍ
कुछ लोगों की
مِّنَ
जिन्नों में से
ٱلْجِنِّ
जिन्नों में से
فَزَادُوهُمْ
तो उन्होंने ज़्यादा कर दिया उन्हें
رَهَقًا
सरकशी में

Waannahu kana rijalun mina alinsi ya'oothoona birijalin mina aljinni fazadoohum rahaqan

'और यह कि मनुष्यों में से कितने ही पुरुष ऐसे थे, जो जिन्नों में से कितने ही पुरूषों की शरण माँगा करते थे। इसप्रकार उन्होंने उन्हें (जिन्नों को) और चढ़ा दिया

Tafseer (तफ़सीर )
وَأَنَّهُمْ
और ये कि वो
ظَنُّوا۟
वो समझते थे
كَمَا
जैसा कि
ظَنَنتُمْ
समझा हमने
أَن
कि
لَّن
हरगिज़ नहीं
يَبْعَثَ
भेजेगा
ٱللَّهُ
अल्लाह
أَحَدًا
किसी एक को

Waannahum thannoo kama thanantum an lan yab'atha Allahu ahadan

'और यह कि उन्होंने गुमान किया जैसे कि तुमने गुमान किया कि अल्लाह किसी (नबी) को कदापि न उठाएगा

Tafseer (तफ़सीर )
وَأَنَّا
और बेशक हम
لَمَسْنَا
छुआ हमने
ٱلسَّمَآءَ
आसमान को
فَوَجَدْنَٰهَا
तो पाया हमने उसे
مُلِئَتْ
भरा हुआ है
حَرَسًا
पहरेदारों से
شَدِيدًا
सख़्त
وَشُهُبًا
और शोलों से

Waanna lamasna alssamaa fawajadnaha muliat harasan shadeedan washuhuban

'और यह कि हमने आकाश को टटोला तो उसे सख़्त पहरेदारों और उल्काओं से भरा हुआ पाया

Tafseer (तफ़सीर )
وَأَنَّا
और बेशक हम
كُنَّا
थे हम
نَقْعُدُ
हम बैठते
مِنْهَا
उसकी
مَقَٰعِدَ
बैठने की जगहों पर
لِلسَّمْعِۖ
सुनने के लिए
فَمَن
तो जो कोई
يَسْتَمِعِ
ग़ौर से सुनता है
ٱلْءَانَ
अब
يَجِدْ
वो पाता है
لَهُۥ
अपने लिए
شِهَابًا
एक शोला
رَّصَدًا
घात में

Waanna kunna naq'udu minha maqa'ida lilssam'i faman yastami'i alana yajid lahu shihaban rasadan

'और यह कि हम उसमें बैठने के स्थानों में सुनने के लिए बैठा करते थे, किन्तु अब कोई सुनना चाहे तो वह अपने लिए घात में लगा एक उल्का पाएगा

Tafseer (तफ़सीर )
وَأَنَّا
औक बेशक हम
لَا
नहीं हम जानते
نَدْرِىٓ
नहीं हम जानते
أَشَرٌّ
क्या शर/ बुराई का
أُرِيدَ
इरादा किया गया
بِمَن
साथ उनके जो
فِى
ज़मीन में हैं
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में हैं
أَمْ
या
أَرَادَ
इरादा किया
بِهِمْ
साथ उनके
رَبُّهُمْ
उनके रब ने
رَشَدًا
ख़ैर/भलाई का

Waanna la nadree asharrun oreeda biman fee alardi am arada bihim rabbuhum rashadan

'और यह कि हम नहीं जानते कि उन लोगों के साथ जो धरती में है बुराई का इरादा किया गया है या उनके रब ने उनके लिए भलाई और मार्गदर्शन का इरादा किय है

Tafseer (तफ़सीर )
कुरान की जानकारी :
अल-जिन्न
القرآن الكريم:الجن
आयत सजदा (سجدة):-
सूरा (latin):Al-Jinn
सूरा:72
कुल आयत:28
कुल शब्द:285
कुल वर्ण:870
रुकु:2
वर्गीकरण:मक्कन सूरा
Revelation Order:40
से शुरू आयत:5447